अमृतसर से सहारनपुर तक हथियारों की ‘सप्लाई लाइन’, 425 कारतूस ने खोले नेटवर्क के राज

अमृतसर से सहारनपुर तक हथियारों की ‘सप्लाई लाइन’, 425 कारतूस ने खोले नेटवर्क के राज

सहारनपुर : पंजाब के अमृतसर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अवैध हथियारों की कथित सप्लाई लाइन का मेरठ एसटीएफ ने खुलासा किया है। सहारनपुर के मिर्जापुर थाना क्षेत्र में एसटीएफ ने घेराबंदी कर तीन अंतरराज्यीय हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से बड़ी संख्या में अवैध हथियारों के साथ 12 बोर के 425 कारतूस बरामद किए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में कारतूस मिलने के बाद जांच का दायरा अब गिरफ्तार आरोपियों से आगे बढ़कर हथियारों के स्रोत, खरीदारों और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित हो गया है।

एसटीएफ के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों की पहचान आजम निवासी पिलखनतला, कोतवाली मंडी, इकराम निवासी बड़ी माहेश्वरी, थाना चिलकाना और दानिश निवासी नकुड़ के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि तीनों कथित तौर पर करीब दो वर्षों से हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े थे।

अमृतसर से निकलती थी हथियारों की खेप

एसटीएफ की जांच के अनुसार, आरोपी पंजाब के अमृतसर से कम कीमत पर हथियार खरीदते थे। इसके बाद हथियारों को सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पहुंचाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क में हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और ठिकाना बदलने का तरीका अपनाया जाता था, ताकि सप्लाई की कड़ी का पता लगाना मुश्किल हो।

जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमृतसर में हथियार उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति या गिरोह कौन है और पश्चिमी यूपी में इन हथियारों को खरीदने वाले लोग कौन-कौन हैं।

हथियारों के साथ 425 कारतूस ने बढ़ाई चिंता

एसटीएफ की कार्रवाई में हथियारों की जो सूची सामने आई है, उसमें एक पंप एक्शन 12 बोर, दो 12 बोर बंदूक, एक 315 बोर बंदूक, तीन एयर गन, एक 12 बोर तमंचा और एक तलवार शामिल है। हालांकि इस बरामदगी में सबसे अहम कड़ी 12 बोर के 425 कारतूस हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में कारतूस मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन्हें किस उद्देश्य से जुटाया गया था।

एसटीएफ मेरठ के अपर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार सिंह के अनुसार, जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस किसी एक व्यक्ति या गिरोह तक पहुंचने थे या इन्हें अलग-अलग खरीदारों को सप्लाई किया जाना था।

ब्लैक स्कॉर्पियो और मोबाइल से खुलेगी कड़ी

एसटीएफ ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही ब्लैक स्कॉर्पियो भी बरामद की है। इसके अलावा दो मोबाइल फोन पुलिस के हाथ लगे हैं। अब इन मोबाइल फोन की जांच के जरिए आरोपियों के संपर्कों की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों की किन-किन लोगों से बातचीत होती थी, अमृतसर में हथियारों की डील किससे होती थी और सहारनपुर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किन जिलों में हथियार पहुंचाए जाते थे। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े नए नाम सामने आने की संभावना है।

सहारनपुर, शामली और आसपास के जिलों में खरीदारों की तलाश

एसटीएफ अब उन संभावित खरीदारों की जानकारी जुटा रही है, जिन्हें आरोपी हथियार और कारतूस सप्लाई करते थे। जांच का दायरा सहारनपुर के साथ-साथ शामली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक बढ़ाया जा रहा है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों को कहां रखा जाता था और खरीदारों तक पहुंचाने के लिए कौन सा तरीका इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि गिरफ्तार आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं।

एसटीएफ के अनुसार, आरोपियों में से एक के पहले भी पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इस बिंदु की भी पुलिस जांच कर रही है।

दो साल से चल रहा था कथित कारोबार

प्रारंभिक जांच के मुताबिक, यह नेटवर्क करीब दो वर्षों से सक्रिय होने की बात सामने आई है। अमृतसर से हथियार खरीदकर उन्हें पश्चिमी यूपी के अलग-अलग इलाकों में पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस अवधि में कितनी खेप सहारनपुर या आसपास के जिलों तक पहुंची।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क में सिर्फ हथियार सप्लाई करने वाले लोग शामिल थे या इनके पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा था।

अब अगली कड़ी पर एसटीएफ की नजर

मिर्जापुर थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूछताछ और बरामद मोबाइल फोन के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

425 कारतूस की बरामदगी ने मामले को सामान्य अवैध हथियार बरामदगी से आगे बढ़ाकर कथित अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क की जांच का रूप दे दिया है। अब एसटीएफ की नजर उस कड़ी पर है जहां से हथियारों की पहली खेप अमृतसर में निकलती थी और उन लोगों पर भी, जिन तक यह खेप पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहुंचती थी।

फिलहाल तीन आरोपी गिरफ्तार हैं, लेकिन पुलिस की जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि इस कथित सप्लाई लाइन के पीछे कितने लोग हैं, कितने समय से यह नेटवर्क सक्रिय था और 425 कारतूस की खेप आखिर किस मंजिल तक पहुंचाई जानी थी।

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